भारत में प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकार के उत्तरदायित्व क्या क्या है?

भारत में प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकार के उत्तरदायित्व क्या क्या है?

निम्न हैं — भारत में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा ।।
प्राथमिक शिक्षा खत्म होने से पहले किसी भी बच्चे को रोका नहीं जाएगा, निकाला नहीं जाएगा या बोर्ड परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी । ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 6 साल से ऊपर है, जो किसी स्कूल में दाखिल नहीं है अथवा है भी तो अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाया/पायी है, तब उसे उसकी उम्र के लायक उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा; बशर्ते कि सीधे तौर से दाखिला लेने वाले बच्चों के समकक्ष आने के लिए उसे प्रस्तावित समय सीमा के भीतर विशेष ट्रेनिंग दी। जानी होगी, जो प्रस्तावित हो । प्रारंभिक शिक्षा हेतु दाखिला लेने वाला बच्चा/बच्ची को 14 साल की उम्र के बाद भी प्रारंभिक शिक्षा के पूरा होने तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी । प्रारंभिक शिक्षा हेतु प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र का निर्धारण उसके जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु तथा विवाह पंजीकरण कानून, 1856 या ऐसे अन्य कागजात के आधार पर किया जाएगा जो उसे जारी किया गया हो । उम्र प्रमाण नहीं होने को स्थिति में किसी भी
बच्चे को दाखिला लेने से वंचित नहीं किया जा सकता । – प्रारम्भिक शिक्षा पूरा करने वाले छात्र को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा । – एक निश्चित शिक्षक – छात्र अनुपात की सिफारिश;
जम्मू-कश्मीर को छोड़कर समूचे देश में लागू होगा; आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए सभी निजी स्कूलों के कक्षा 1 में दाखिला लेने के लिए 25 प्रतिशत का आरक्षण; शिक्षा की गुणवत्ता में अनिवार्य सुधार; स्कूल शिक्षक को पांच वर्षों के भीतर समुचित व्यावसायिक डिग्री प्राप्त होनी चाहिए, अन्यथा उनकी नौकरी चली जाएगी; स्कूल का बुनियादी ढांचा 3 वर्षों के भीतर सुधारा जाए अन्यथा उसकी मान्यता रह कर दी जाएगी ।- वित्तीय बोझ राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के बीच साझा किया जाएगा ।

सरकार के उत्तरदायित्व

शिक्षा के अधिकार अधिनियम पर वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने कहा “It  would be the legally enforceable duty of the center and the states to provide free and compulsory education”.

1. राज्य सरकार व स्थानीय सत्ता का दायित्व है कि वे जिन क्षेत्रों में विद्यालय नहीं हैं। अथवा पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं वहां तीन वर्ष की अवधि में विद्यालयों की स्थापना करें।

2. केन्द्र व राज्य सरकारें इस हेतु वित्तीय भार साझा रूप से उठायेगी ।

3. केन्द्र सरकार इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु व्यय भार राशि का अनुमान लगायेगी।

4. केन्द्र सरकार राज्य सरकारों की सहायता सुझावों के माध्यम से समय समय पर राज्य सरकारों को वित्तीय अनुदान व सहायता प्रदान करेगी ।

5. केन्द्र सरकार राष्ट्रपति से अनुरोध करेगी कि राज्य सरकारों को दी जाने वाली अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जाँच वित्त आयोग (अनुच्छेद 280 ) से करवाये ।।

6. राज्य/स्थानीय/उपर्युक्त सरकारें विद्यालय भवन, शैक्षणिक कर्मचारी, शिक्षण अधिगम, उपकरण उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करेगी । बालकों के प्रवेश उपस्थिति प्राथमिक शिक्षा के पूर्ण होने सम्बन्धित प्रक्रिया का पर्यवेक्षण करेगी । गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा के लिए अधिनियम में निर्धारित मानदण्डों को क्रियान्वित करवाने लिए उत्तरदायी होगी ।

विशेष टिप्पणी

राजस्थान में शिक्षा का अधिकार कानून को लागू करने के लिए केन्द्र से 14000 करोड़ रुपये की मांग की गई है । यह राशि 6 से 14 साल के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने पर खर्च होगी ।
शिक्षा मंत्री मास्टर भंवरलाल ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ उच्च स्तरीय बैठक में अनिवार्य शिक्षा कानून को लागू करने पर चर्चा में यह मांग रखी । बैठक में शिक्षा मंत्री ने राज्य के मौजूदा शिक्षा की हालात ओर जरूरतों के बारे में बताया ।
सिब्बल ने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पत्र के अनुसार राजस्थान की आरटीई के तहत स्कूल खोलने और शिक्षक भर्ती के लिए केन्द्र से कुल राशि का 75 प्रतिशत तक केन्द्रीय मदद के रूप में देने का प्रयास किया जाएगा । अभी राज्य को 65 और 25 के अनुपात में मदद मंजूर की है । सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार को सबसे पहले बैकलॉग के पदों को भरा जाना चाहिए | एक शिक्षक वाले स्कूलों में कम से कम दो शिक्षक लगाएं । राज्यों के शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन 18, 19 जून को दिल्ली में होगा ।

वित्तीय स्रोत

मूलतः राज्य, समाज व समुदाय के सहयोग से इस शिक्षा अधिनियम को क्रियान्वित करेंगे व गुणवत्तायुक्त शिक्षा के अवसर प्रत्येक बालक के लिये उपलब्ध करायेंगे । विश्व के कुछ ही देशों में निःशुल्क व बाल केन्द्रित शिक्षा व बालक अनुकूल शिक्षा का प्रावधान है ।
केन्द्र व राज्य सरकारें मिलकर इस अधिनियम हेतु वित्तीय भार उठायेगी । केन्द्र सरकार ने वित्त आयोग की मदद से राज्य सरकारों को इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है । केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता के अतिरिक्त राज्य सरकारें अन्य आवश्यक व बचे हुए खर्चा हेतु आवश्यक राशि जुटाने या उपलब्ध कराने हेतु उत्तरदायी होगी । केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा वहन किये जा रहे खर्चा के अतिरिक्त खर्चा को समाज, विकास निकाय, व्यापारिक संगठन व नागरिक मिलकर वहन करेंगे ।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 को लागू करने के लिये केन्द्र व राज्य सरकारें 65%- 35% के अनुपात से वित्तीय भार वहन करेंगी और उत्तरपूर्वी राज्यों के लिए यह अनुपात 90%से 10% निर्धारित किया गया है ।

विद्यालय हेतु मानदण्ड एवं मानक ]

. अध्यापकों की व्यवस्था!
– कक्षा प्रथम से पाँचवी तक
– कक्षा 6 से 8 तक 2. भवन व्यवस्था
– प्रत्येक अध्यापक हेतु पृथक कक्षा कक्ष ।

– कम से कम एक कार्यालय

– प्रधानाचार्य कक्ष

– लड़के व लड़कियों के लिये पृथक शौचालय विद्यार्थियों की संख्या |

अध्यापकों की संख्या 60
प्रधानाध्यापक – सभी विद्यार्थियों हेतु स्वच्छ, सुरक्षित व पर्याप्त पीने का पानी – मिड-डे-मील बनाने हेतु प्रति विद्यालय एक रसोई कक्ष | 35 विद्यार्थी संख्या
→ 1. सामाजिक अध्ययन प्रति कक्षा हेतु 3|
→ 2. विज्ञान व गणित | अध्यापक
→ 3. भाषा 100 से अधिक
| प्रधानाचार्य
→ 1. कला शिक्षा अंशकालीन अनुदेशक → 2. स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा
3. कार्य योजना शिक्षा – खेल का मैदान – विद्यालय भवन की सुरक्षा हेतु चहार दीवारी ।

3. कार्यदिवस व एक शैक्षणिक सत्र हेतु अनुदेशन के कालांश
– कक्षा प्रथम से कक्षा पांच तक 200 कार्य दिवस – कक्षा 6 से कक्षा 8 तक 220 कार्य दिवस । – कक्षा प्रथम से कक्षा पांच तक 800 अनुदेशन हेतु घण्टे ।
कक्षा 6 से कक्षा 8 तक 1000 घंटे | 4. पाठ्यक्रम एवं प्राथमिक शिक्षा की पूर्णता – प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम व मूल्यांकन हेतु प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा
निर्धारित की जायेगी । पाठ्यक्रम, बालक के सर्वांगीण विकास, बालक में ज्ञान, प्रतिभा, ……………. का निर्माण, शारीरिक व मानसिक क्षमताओं का विकास, क्रिया द्वारा शिक्षण, ज्ञान की

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