विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की परीक्षाओं के लिए क्या सिफारिशें थी?

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की परीक्षाओं के लिए क्या सिफारिशें थी?

 व्यवस्था की जाए । 

विश्वविद्यालयों का संगठन और नियंत्रण

आयोग ने विश्वविद्यालयों के विधान संगठन और नियंत्रण के लिए निम्नलिखित संस्तुतियाँ प्रस्तुत की है
1. विश्वविद्यालय शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा जाए ।

2. इन्हें अनुदान देने के लिए एक केन्द्रीय अनुदान आयोग की नियुक्ति की जानी चाहिए
3. विभिन्न शाखाओं में विशेषज्ञों के पेनल्स द्वारा अनुदान आयोग की सहायता की जानी चाहिए |

4. कोई भी विश्वविद्यालय पूर्णत: सम्बद्धन प्रकार का नहीं होना चाहिए ।

5. राजकीय महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के घटक महाविद्यालयों में क्रमश: परिवर्तित किया जाना चाहिए ।

6. महाविद्यालयों की प्रबन्ध समितियाँ उचित रूप से गठित की जानी चाहिए ।

7. विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या सीमित होनी चाहिए ।

8. प्रत्येक विश्वविद्यालय में निम्नलिखित अधिकारियों को स्थान दिया जाना चाहिए
विजिटर – इस पद पर देश का राष्ट्रपति होगा ।

(i) कुलपति – सामान्यत: राज्य का राज्यपाल कुलपति होगा ।

(iii) उपकुलपति – यह पद पूर्ण कालीन होगा और उसे वेतन दिया जायेगा । उपकुलपति की नियुक्ति कुलपति करेगा ।

(iv) सीनेट
एकात्मक और संघात्मक विश्वविद्यालयों की सीनेट में न 100 से अधिक सदस्य नहीं होगें । आधे सदस्य विश्वविद्यालयों से बाहर के होगें

(v) कार्यकारी परिषद – इसमें अधिक से अधिक 20 सदस्य होगें ।

(vi) शैक्षणिक समिति – इसमें अधिक से अधिक 40 सदस्य होगें ।
आयोग के सुझावों का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों को इकाइयाँ बनाना और बाह्य नियंत्रण से मुक्त करना था । आयोग का यह सुझाव कि विश्वविद्यालीय शिक्षा समवर्ती सूची में शामिल की जानी चाहिए अति सराहनीय था । आयोग ने विभिन्न समितियों के सदस्यों और विश्वविद्यालयों के कार्यभार और व्यय को काफी कम कर दिया था । जिससे वे शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेगें।

वित व्यवस्था

आयोग ने उच्च शिक्षा को वित्त व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित सुझाव दिये है:

1. राज्यों को उच्च शिक्षा को वित्त पोषित करने के लिए अपने उतरदायित्व को स्वीकार करना चाहिए |

2. व्यक्तिगत महाविद्यालयों की सहायता आवर्ती व्यय के रूप में भवन और उपकरणों के | लिए होनी चाहिए | बाद में यह समानता के आधार पर हो यथा-वर्तमान शिक्षकों के वेतन का आधा और अन्य अनुमानित व्यय का एक तिहाई ।।

3. शैक्षिक उद्देश्यों के लिए दान को प्रोत्साहित करने के लिए आयकर के कानूनों में परिवर्तन हेतु कदम उठाये जाने चाहिए ।

4. आगामी पाँच वर्ष की अवधि के अन्तर्गत विश्वविद्यालय शिक्षा के विकास के लिए लगभग 10 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि सरकार को प्रदान करनी चाहिए ।

5. अनुदान देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग गठित किया जाना चाहिए । उच्च शिक्षा के प्रसार और उसके स्तर को ऊँचा उठाने के लिए धन की बहुत आवश्यकता होती है। धन के अभाव में उच्च शिक्षा भी उचित व्यवस्था नहीं की जा सकती । इसी को ध्यान में रखकर आयोग ने ये सुझाव दिये थे, लेकिन उच्च शिक्षा पर सरकार धन व्यय नहीं करना चाहती या इसे वह अपना उतरदायित्व ही नहीं समझती, इसलिए उसने अभी तक आयोग की सिफारिशों पर कोई ध्यान नहीं दिया है ।।

ग्रामीण विश्वविद्यालय

आयोग ने गांवों में रहने वाले लोगों के लिए उचित शिक्षा के बारे में यह विचार पेश किये हैं:–

1. छोटे-छोटे आवासिक स्नातक पूर्ण महाविद्यालय स्थापित किये जाये ।

2. इनके केन्द्र में एक ग्रामीण विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए ।

3. कॉलेज में पढ़ने वालों की संख्या लगभग 300 और सब कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के छात्रों की संख्या 2500 से अधिक न रखी जाये ।

4. प्रत्येक कॉलेज का उद्देश्य छात्रों को सामान्य शिक्षा देना और उनकी व्यक्तिगत रूचियों एवं मनोवृतियों का विकास करना होना चाहिए ।

5. प्रत्येक छात्र को सामान्य शिक्षा का त्याग किये जाने बिना किसी विशेष विषय की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाए ।

6. प्रत्येक प्रान्त में ‘ग्रामीण शिक्षा-परिषद्’ की स्थापना की जाए ।

7. केन्द्रीय स्तर पर ‘अखिल भारतीय ग्रामीण- शिक्षा परिषद’ का निर्माण किया जाए ।

भारत सरकार ने आयोग के सुझावों को मान्यता दी और 1954 में ग्रामीण उच्चतर शिक्षा समिति की स्थापना की । यह समिति ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है । आयोग के सुझाव के अनुसार ‘रूरल इंस्टीट्यूट’ नामक स्नातक पूर्व कॉलेजों की स्थापना की गई । इसके लिए सरकार अनुदान और छात्रों के लिए छात्रवृतियाँ भी प्रदान करती है ।

आयोग की सिफारिशों का समालोचनात्मक मूल्यांकन

आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के सम्बन्ध में अत्यन्त विस्तृत एवं उपयोगी सुझाव एवं सिफारिशें प्रस्तुत की है, जिनका समालोचनात्मक मूल्यांकन निम्नलिखित है

1. आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए श्रेष्ठतम उद्देश्यों का निर्धारण किया था, जो स्वतंत्र भारत की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं प्रजातांत्रिक आवश्यकताओं की पूर्ति
में सहायक सिद्ध हुए |

2. आयोग ने शिक्षकों के महत्व एवं उतरदायित्व, शिक्षकों की स्थिति में सुधार एवं उनके वेतन आदि के विषय में महत्वपूर्ण सुझाव एवं संस्तुतियां देकर शिक्षकों की सामाजिक
एवं आर्थिक स्थिति में उन्नति करने का प्रयास किया ।

3. आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षण के दिवसों की संख्या में वृद्धि, उतम पुस्तकालय, सुसज्जित प्रयोगशालाएं उत्तीर्ण होने और विभिन्न श्रेणियों के लिए अंको के प्रतिशत में वृद्धि आदि अनेक उच्च कोटि के सुझाव दिये ।।

4. आयोग ने विभिन्न व्यवसायों में कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए सांयकालीन शिक्षण की व्यवस्था का सुझाव देकर उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए सुअवसर प्रदान
किया। 

5. आयोग ने स्नातकोत्तर प्रशिक्षण और अनुसंधान हेतु व्यापक एवं उपयोगी सुझाव प्रस्तुत कर देश में वैज्ञानिक प्रगति हेतु मार्ग प्रशस्त किया |

6. आयोग व्यावसायिक शिक्षा से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सुझावों के परिणामस्वरुप देश में विभिन्न विश्वविद्यालयों में विविध व्यवसायों की शिक्षा का शुभारम्भ हुआ, जिससे देश
आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुआ ।

7. आयोग ने भारतीय भाषाओ और संघीय भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में स्वीकार करके भाषा-समस्या के समाधान हेतु सार्थक प्रयास किया |

8. आयोग ने छात्र-क्रियाओ एवं उनके कल्याण, स्त्री शिक्षा आदि के बारे में उपयोगी सुझाव दिये |

9. आयोग के विश्वविद्यालयों के संगठन एवं नियंत्रण सम्बन्धी सुझाव भी उपयोगी थे । उन्होंने उच्च शिक्षा को समवर्ती सूची में रखने की बात की. जो सराहनीय है ।।

10. आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं ग्रामीण विश्वविद्यालयों के बारे में जो विचार दिये वह वास्तव में मिल का पत्थर है । उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि आयोग ने देश की वर्तमान उच्च शिक्षा में आधारभूत परिवर्तन की आवश्यकता अनुभव की और तदनरूप विभिन्न सुझाव एवं संस्तुतिया प्रस्तुत की, जिनके क्रियान्वयन से विश्वविद्यालयी शिक्षा में आशातीत प्रगति हुई।

स्वमूल्यांकन प्रश्न

2. छात्र क्रियाएँ एवं कल्याण के सम्बन्ध में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की सिफारिशों का उल्लेख कीजिए? विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने स्त्री शिक्षा के लिए क्या सुझाव थे?

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